♦ ♦ ♦ ♦ ♦ ♦ सन्देश♦ ♦ ♦ ♦ ♦ ♦

मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की इच्छानुरूप क्षेत्रीय भाषाओं  का विकास भारतीय संस्कृति का विकास है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही उनका महत्वपूर्ण वक्तव्य इन क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के सन्दर्भ में आया था। हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद उस दिशा में सार्थक प्रयास कर रही है। हिन्दी, उर्दू के साथ-साथ भोजपुरी, अवधी, ब्रजभाषा एवं बुन्देली भाषा पर संगोष्ठियों, कवि सम्मेलनों, कार्यशालाओं एवं नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से निरन्तर कार्यक्रम संचालित किये जायेंगे।
उत्तर प्रदेश शासन ने एकेडेमी को उदारतापूर्वक संसाधन प्रदान कर हमारा उत्साह बढ़ाया है। हमारी प्राथमिकता होगी एकेडेमी के पारम्परिक अकादमिक स्वरूप को संरक्षित रखने की और कई नये  नामित पुरस्कारों द्वारा साहित्यकारों के मनोबल को ऊँचा करने की ।
 
 
डाॅ0 उदय प्रताप सिंह का जन्म 1955 ई0 में आजमगढ़ जनपद के पखनपुर गाँव में हुआ था। सम्प्रति वह वाराणसी के उपनगर सारनाथ में निवास करते हैं। आप की शिक्षा-दीक्षा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर में सम्पन्न हुई। रामभक्ति साहित्य के मर्मी विद्वान् डाॅ0 भगवती प्रसाद सिंह के निर्देशन में आप ने भक्तिकाल पर महत्वपूर्ण शोध किया है।
वह संत-साहित्य के व्याख्याता और मर्मी विद्वान् हैं। भक्तिकाल मुख्यतः संत साहित्य पर डाॅ0 सिंह की स्थापनायें महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। गुरु गोरखनाथ, स्वामी रामानंद, श्रीवल्लभाचार्य, संत कबीर, भक्त रैदास और आपा साहब पर उनका गहन अध्ययन है। डाॅ0 उदय प्रताप सिंह की राष्ट्रीय चेतना ‘आलोचना’ ‘यात्रा वृत्तांत’ और ‘व्यक्तिव्यंजक’ निबंधों में  पूर्णतः मुखरित हुई है। संस्कृतिधर्मी, आलोचक, और निबंधकार के रूप में उनकी अलग पहचान है। अबतक उनकी बीस लिखित और पंद्रह सम्पादित रचनाएँ प्रकाशित हैं। इन रचनाओं में अधिसंख्य संत साहित्य पर केन्द्रित हैं। ‘स्वामी रामानंद’ व श्रीवल्लभाचार्य का प्रकाशन साहित्य अकादमी-दिल्ली से तो ‘संतों के संवाद’- राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से हुए हैं।
डाॅ0 सिंह को कई स्थानीय एवं राष्ट्रीय पुरस्कार/ सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान जैसी संस्थाओं ने उन्हें पुस्कृत/ सम्मानित किया है। हिन्दी के अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में वे विदेश यात्राएँ भी कर चुके है। विश्व रामायण सम्मेलन और हिन्दी भाषा के विकास की योजनाओं में उनकी सक्रियता सराहनीय है।
अध्यक्ष के रूप में एकेडेमी को उन्होंने नया गौरव प्रदान किया है। ‘लेखक के द्वार’ अभियान में एकेडेमी-‘कीनाराम’, ‘भारतेन्दु’, ‘महावीरप्रसाद द्विवेदी’, ‘प्रेमचंद’, ‘शांतिप्रिय द्विवेदी’, ‘सूर्यकांत त्रिपाठी निराला’, ‘जयशंकर प्रसाद’, ‘सुमित्रानंदन पंत’, ‘महादेवी वर्मा’, ‘हजारी प्रसाद द्विवेदी, ‘परशुराम चतुर्वेदी’, ‘श्यामनारायण पाण्डेय’, ‘शिवप्रसाद सिंह’ की जन्मभूमि पर महत्वपूर्ण व प्रभावी आयोजन कर चुकी है। सम्प्रति उनके निर्देशन में लगभग नब्बें वर्षों से संरक्षित तीन सौ पांडुलिपियों पर कार्य चल रहा है। एकेडेमी में गुरु गोरक्षनाथ (शिखर सम्मान), गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीर, महादेवी वर्मा, फिराक गोरखपुरी, भिखारी ठाकुर, महात्मा बनादास, कुंभनदास एवं अन्याय पुरस्कारों का नव सृजन कर डाॅ0 सिंह ने हिन्दी जगत का ध्यान एकेडेमी की सक्रियता की ओर आकृष्ट किया है। सम्प्रति, उनके कार्यकाल में तीस महत्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन भी सम्पन्न हो चुका है।
 डाॅ0 उदय प्रताप सिंह
 
अध्यक्ष, हिन्दुस्तानी एकेडेमी,
प्रयागराज(उ0प्र0)
कार्यकालः सन् 2018...