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हिन्दुस्तानी ऐकेड़मी, इलाहाबाद || Hindustani Academy

♦ ♦ ♦ ♦ ♦ ♦ प्रस्तावित कार्ययोजनायें♦ ♦ ♦ ♦ ♦ ♦

प्रस्तावित कार्ययोजनाएँ
प्रकाशन 
 
(1)  हिन्दुस्तानी एकेडेमी द्वारा प्रकाशित ‘हिन्दुस्तानी’ त्रैमासिक पत्रिका शोध और सृजन की महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में से एक है। यह पंजीकृत पत्रिका है तथा वर्तमान में यूजीसी से स्वीकृत शोध पत्रिकाओं की सूची में भी इसे शामिल कर लिया गया है। इसका एक अंक भोजपुरी भाषा पर केन्द्रित विशेषांक के रुप में प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। इसमें देश भर के भोजपुरी भाषा के विद्वानों से आलेख प्राप्त कर चयनित कर अंक तैयार किया जायेगा। जिसमें भोजपुरी की सभी विधाओं पर आलेख होंगे। 
 
(2) भोजपुरी भाषा में शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए संदर्भ ग्रन्थ तैयार कर प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। संदर्भ ग्रन्थों का प्रकाशन एकेडेमी के उद्देश्यों में शामिल है। यह संदर्भ ग्रन्थ हिन्दुस्तानी पत्रिका में सन् 1931 से प्रकाशित भोजपुरी पर केन्द्रित आलेखों के संकलन तथा अन्य स्रोतों से आलेख व शोध पत्रों को संकलित कर तैयार किया जायेगा। जिसके लिए मूर्धन्य विद्वानों का सहयोग लिया जायेगा। 
 
(3) देशभर के प्रबुद्ध भोजपुरी भाषा के विद्वानों से प्राप्त पाण्डुलिपियों को चयनित कर  भोजपुरी  भाषा के दो मौलिक ग्रन्थों को प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए भोजपुरी के कुछ प्रमुख विद्वानों, लेखकों से संपर्क किया जायेगा - पाण्डेय कपिल (पटना), अर्जुन तिवारी (वाराणसी), सूर्यदेव पाठक ‘पराग’ (वाराणसी), प्रो0 रामदेव शुक्ल (वाराणसी), डाॅ0 तैयब हुसैन (पटना), प्रो0 सदानंद शाही (वाराणसी), वीरेन्द्र नारायण पाण्डेय (मुजफ्फरपुर), सुनील कुमार ‘तंग’ (सीवान) इत्यादि। यह मौलिक ग्रन्थ भोजपुरी भाषा की विविध विधाओं लोकगीत, लोकगाथा, कथा-साहित्य, संस्मरण, व्यंग्य, कविता इत्यादि पर केन्द्रित होंगे। 
 
(4) साहित्य कोश - भोजपुरी साहित्य की महत्वपूर्ण अवधारणाओं, प्रवृत्तियों, रचनाकारों तथा उनकी कृतियों को संकलित कर वृहद साहित्यकोश का निर्माण प्रस्तावित है। इस कोश के माध्यम से भोजपुरी के साहित्यिक विकास तथा रचनाकारों की समग्र जानकारी कलमबद्ध रूप में प्रस्तुत की जायेगी। यह कोश कई खण्डों में प्रकाशित किया जायेगा। 
 
(5) साहित्येतिहास लेखन - भोजपुरी भाषा के इतिहास को संकलित कर प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। भोजपुरी भाषा के साहित्यिक तथा भाषिक विकास क्रम को समझने  के लिए उसका इतिहास लिपिबद्ध किया जाना आवश्यक है। यद्यपि इस क्षेत्र में काम हुआ है किन्तु यह एक विकासवान प्रक्रिया है अतः विद्वत मण्डल का गठन कर भोजपुरी साहित्य का इतिहास लिपिबद्ध किया जाना अत्यन्त आवश्यक है। 
 
 
विद्वानों की समिति का गठन - इन योजनाओं को लागू करने के लिए एक विषय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया जायेगा। जो शासन के अनुमोदनोपरान्त कार्य करेगी। 
 
कार्यक्रम - हिन्दुस्तानी एकेडेमी राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक गतिविधियों का केन्द्र है। संगोष्ठियाँ, व्याख्यानमालाएँ, कार्यशालाएँ आदि का क्रियान्यवन इसके उद्देश्यों में शामिल है। भोजपुरी भाषा को केन्द्र में रखकर वर्ष में दो विस्तृत संगोष्ठियों एवं एक कार्यशाला का आयोजन प्रस्तावित है।
 
(1) संगोष्ठी 
विषय -  भोजपुरी भाषा का सौन्दर्यशास्त्र
 
(2) व्याख्यानमाला 
            विषय - भोजपुरी  भाषा का विकास क्रम (एकल व्याख्यान)
         अथवा
     भोजपुरी साहित्य की विकास यात्रा (एकल व्याख्यान)
 
देशभर के अन्य संस्थानों जिनमें भोजपुरी भाषा से सम्बन्धित कार्य किये जा रहे है उनसे सम्पर्क कर विद्वानों की नाम सूची प्राप्त किया जाना प्रस्तावित है। यह कार्यक्रम भोजपुरी संस्थान, लखनऊ तथा भोजपुरी अध्ययन केन्द्र, वाराणसी के सहयोग से भोजपुरी क्षेत्र जैसे - वाराणसी में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।
अवधी भाषा
प्रकाशन 
 
(1) ‘हिन्दुस्तानी’ त्रैमासिक पत्रिका का अवधी पर केन्द्रित विशेषांक का प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तुत पत्रिका से देशभर के विद्वान एवं शोध छात्र जुड़े हुए हैं। ‘अवधी भाषा क्षेत्र’ के विद्वानों से सम्पर्क करके एवं अयोध्या शोध संस्थान के माध्यम से विद्वानों से सम्पर्क कर आलेखों का संचयन कर ‘अवधी भाषा’ पर एक विशेषांक का प्रकाशन प्रस्तावित है। 
(2) ‘अवधी साहित्य’ के विभिन्न पक्षों एवं विधाओं पर - लोक गीत, लोकगाथा, मुहावरे, लोकोक्तियों, प्रमुख ग्रन्थों पर, अवधी साहित्य का विकास क्रम, इतिहास इत्यादि विविध विषयों पर लेखों का संकलन कर तथा ‘हिन्दुस्तानी’ पत्रिका में 1931 से अब तक प्रकाशित आलेखों का संकलन कर एक सन्दर्भ ग्रन्थ तैयार किया जाना प्रस्तावित है जो शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं जिज्ञासुओं के लिये अत्यन्त उपयोगी होगा। 
(3) देशभर के ‘अवधी भाषा’ के विद्वानों से सम्पर्क कर पाण्डुलिपियों को प्राप्त करके चयनित कर ‘अवधी भाषा’ के दो महत्वपूर्ण मौलिक ग्रथों का प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है। 
(4) साहित्य-कोश - अवधी भाषा के रचनाकारों, प्रवृत्तियों, कृतियों एवं अवधारणाओं को संकलित कर अवधी के साहित्य कोश को प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। जिससे अवधी की कृतियों, रचनाकारों, प्रवृत्तियों, तथा अवधारणाओं के बारे में जानकारी एक साथ आसानी से मिल सके। 
(5) ‘अवधी भाषा’ के इतिहास को कालक्रम के आधार पर लिपिबद्ध किया जाना प्रस्तावित है। इतिहास को लिपिबद्ध किये जाने के लिए अवधी के विद्वत मंडल का गठन किया जाना प्रस्तावित है। 
 
विद्वानों की समिति का गठन - इन योजनाओं को लागू करने के लिए भाषा विशेष के विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन किया जायेगा। जो शासन के अनुमोदनोपरान्त कार्य करेगी। 
 
कार्यक्रम - वर्ष में अवधी भाषा को केन्द्र में रखकर दो भव्य कार्यक्रम तथा एक कार्यशाला किया जाना प्रस्तावित है। 
 
(1) संगोष्ठी - अवधी भाषा पर अयोध्या शोध संस्थान एवं हिन्दुस्तानी एकेडेमी के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन दो सत्रों में प्रस्तावित है। 
 
विषय - ‘अवधी भाषा साहित्य की विकास यात्रा’
प्रस्तावित प्रतिभागी - (आठ विद्वान)
 
(2) संगोष्ठी - 
विषय - हिन्दी भाषा में अवधी का योगदान -
प्रस्तावित प्रतिभागी - (चार विद्वान)
ब्रजभाषा
प्रकाशन
(1) हिन्दुस्तानी एकेडेमी से प्रकाशित होने वाली हिन्दुस्तानी त्रैमासिक पत्रिका वर्ष 1931 ई0 से निरन्तर प्रकाशित हो रही है पाठकों के बीच में इसने महत्वपूर्ण जगह बनाई है। इसके विशेषांक अत्यन्त लोकप्रिय हुए हैं। ‘ब्रजभाषा तथा संस्कृति’ को केन्द्र में रखकर हिन्दुस्तानी पत्रिका का एक अंक विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। ब्रजभाषा के प्रबुद्ध लेखकों से इसके आलेखों के लिए संपर्क किया जायेगा। 
(2) हिन्दी तथा क्षेत्रीय भाषाओं में शोध एवं अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिए सन्दर्भ ग्रन्थों को तैयार कर उनका प्रकाशन किया जाना नितान्त आवश्यक है। हिन्दुस्तानी पत्रिका में ब्रजभाषा पर 1931 से अब तक कई महत्वपूर्ण आलेखों को प्रकाशित किया गया है उन लेखों को संकलित कर तथा अन्य स्रोतों से सामग्री लेकर। ग्रन्थ को समृद्ध कर ‘ब्रजभाषा एवं उसका साहित्य’ विषय पर एक सन्दर्भ ग्रन्थ का प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है। जो शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने में सहायक 
(3) किसी भी भाषा विशेष के मौलिक ग्रन्थों का प्रकाशन उसको समृद्ध करता है। ब्रजभाषा के समर्थ विद्वानों की पाण्डुलिपियों को आमंत्रित करके - ब्रजभाषा की विविध विधाओं पर केन्द्रित पाण्डुलिपियों को चयनित कर दो विशिष्ट मौलिक ग्रन्थों का प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए वृन्दावन शोध संस्थान तथा ब्रजभाषा के रचनाकारों से सम्पर्क किया जायेगा। 
(4) साहित्य कोश - साहित्य कोश का मुख्य उद्देश्य ब्रजभाषा की महत्वपूर्ण कृतियों, रचनाकारों, प्रवृत्तियों, लोक कथाओं, अवधारणाओं को एक साथ संकलित कर वृहद साहित्यकोश रूप में प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। यह कई खण्डों में प्रकाशित किया जायेगा। इसके लिए विद्वत जनों एवं ब्रजभाषा के विशेषज्ञों से सहयोग लेकर-विद्वत् मण्डल का गठन कर कोश तैयार किया जायेगा। 
(5) साहित्येतिहास लेखन - किसी भी भाषा विशेष का इतिहास उसके विकास क्रम को लक्षित करता है। उसकी दशा और दिशा को निर्धारित करता है। ब्रजभाषा के भाषिक एवं साहित्यिक विकास क्रम को समझने के लिए कालक्रम के अनुसार ब्रजभाषा का इतिहास लिपिबद्ध कर प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए ब्रजभाषा के विद्वानों एवं विशेषज्ञों की समिति का गठन किया जायेगा, जो इस कार्य को पूर्णतः प्रदान करेगी। 
 
(7) विद्वानों की समिति का गठन - इन योजनाओं को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए एक विषय-विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया जायेगा, जो शासन के अनुमोदनोपरान्त कार्य करेगी।
 
कार्यक्रम - वर्ष में ब्रजभाषा पर केन्द्रित दो भव्य कार्यक्रमों का किया जाना प्रस्तावित है तथा ब्रजभाषा पर केन्द्रित एक कार्यशाला भी प्रस्तावित है।
 
(1) संगोष्ठी -
विषय - ब्रजभाषा साहित्य का विकास एवं वर्तमान स्थिति
अथवा
ब्रजभाषा साहित्य की विकास यात्रा
 
एक वृहद संगोष्ठी दो सत्रों में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। जिसमें दो सत्रों में चार-चार विद्वानों को आमंत्रित किया जायगा।
(2) व्याख्यानमाला -
विषय -ब्रजभाषा का हिन्दी में अवदान
 
बुन्देली भाषा
प्रकाशन
(1) हिन्दुस्तानी एकेडेमी द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘हिन्दुस्तानी’ त्रैमासिक शोध सृजन की महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में से एक है। यह पंजीकृत पत्रिका है तथा वर्तमान में यूजीसी से स्वीकृत शोध पत्रिकाओं की सूची में भी इसे शामिल कर लिया गया है। वर्ष में चार अंक इसके प्रकाशित किये जाते हैं। बुन्देली भाषा पर केन्द्रित विशेषांक के रूप में वर्ष में एक अंक प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। 
(2) बुन्देली भाषा में शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए संदर्भ ग्रंथ तैयार करना तथा उसका प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है। हिन्दुस्तानी पत्रिका 1931 से प्रकाशित हो रही है तथा इसमें बुन्देली भाषा पर अनेक आलेख प्रकाशित किये गये हैं उन आलेखों को संकलित कर तथा अन्य स्रोतों (प्रबुद्ध विद्वानों के आलेख) से सामग्री एकत्र कर संदर्भ ग्रंथ तैयार करना प्रस्तावित है। 
(3) देशभर के विद्वानों से सम्पर्क स्थापित कर बुन्देली भाषा पर केन्द्रित विविध विधाओं पर पाण्डुलिपियों को प्राप्त कर तथा चयनित कर दो महत्वपूर्ण मौलिक ग्रन्थों का प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। 
(4) साहित्यकोश - इस कोश के माध्यम से बुन्देली भाषा के साहित्यिक विकास, रचनाकारों, कालगत साहित्यिक प्रवृत्तियों, कृतियों तथा अवधारणाओं को संकलित कर प्रकाशित किया जायेगा। जिससे समग्र रूप में बुन्देली भाषा का विकास प्रवाह परिलक्षित हो सके तथा बुन्देली भाषा के विकास क्रम को समग्र रूप में जाना जा सके एवं बुन्देली भाषा के रचनाकारों, प्रवृृत्तियों, कृतियों तथा अवधारणाओं के बारे में जानकारी आसानी से मिल सके। 
(5) साहित्येतिहास लेखन - बुन्देली भाषा के साहित्य के इतिहास को लिपिबद्ध करने के लिए विद्वत मण्डल का गठन कर, उनके द्वारा बुन्देली भाषा के इतिहास को संकलित कर, प्रकाशित किया  जाना प्रस्तावित है। बुन्देली भाषा के साहित्यिक विकास एवं वर्तमान स्थिति को समझने के लिए उसके इतिहास को कालक्रम के आधार पर कलमबद्ध किया जाना अत्यन्त आवश्यक है यद्यपि इसके लिए पूर्व में प्रयास भी हुए हैं किन्तु इतिहास एक सतत् प्रवाहमान प्रक्रिया है जिसमें हमेशा कुछ न कुछ जुड़ता ही है। 
विशेषज्ञ कमेटी का गठन - इन योजनाओं को लागू करने के लिए एक विषय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया जायेगा। जो शासन के अनुमोदनोपरान्त कार्य करेगी।
कार्यक्रम - वर्ष में दो बड़े कार्यक्रम बुन्देली भाषा पर तथा एक कार्यशाला का किया जाना प्रस्तावित है -
 
(1) व्याख्यानमाला 
विषय - बुन्देली साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ
(एकल व्याख्यानमाला)
 
(2) संगोष्ठी
विषय - बुन्देली साहित्य की प्रवृत्तियाँ एवं नये रचनाकार
उर्पयुक्त कार्यक्रम के लिए देश में जिन संस्थानों पर बुन्देली भाषा में कार्य किया जा रहा है उनसे सम्पर्क किया जाना प्रस्तावित है। उनसे बुन्देली के मर्मज्ञ विद्वानों की नामों की सूची प्राप्त की जायेगी। 
 
1. अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावित कार्ययोजनाएँ
(1) कार्यशाला  - प्रत्येक क्षेत्रीय भाषाओं (अवधी, ब्रज भोजपुरी, बुन्देली) की विविध विधाओं लोकगीत, लोकगाथा, कविता, कथा-साहित्य, व्यंग्य, गजल आदि पर युवा पीढ़ी को मार्गदर्शन देने हेतु कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। प्रत्येक दो माह पर क्षेत्रीय भाषाओं (अवधी, ब्रज भोजपुरी, बुन्देली) पर एक कार्यशाला आयोजित की जायेगी। जिसमें विषय - विशेषज्ञ विधा विशेष पर क्षेत्रीय भाषा में रचनात्मक लेखन के संबंध में विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे तथा युवा छात्रों की समस्या का समाघान भी प्रस्तुत किया जायेगा। इसमें नगर के कालेज/ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को आमंत्रित किया जायेगा। इसमें एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा जिसमे क्षेत्रीय भाषा जैसे भोजपुरी लोक कथा, लोकगीत, गजल, लोक कहावतें आदि पर यदि कार्यशाला है तो लोक कथा, लोकगीत, गजल, लोक कहावतें आदि सें संबंधित रचनाओं को लिपिबद्ध करना होगा तथा श्रेष्ठ तीन रचनाओं को पुरस्कृत किया जायेगा। इसके माध्यम से युवाओं में अपनी क्षेत्रीय भाषा के प्रति जिज्ञासा एवं ज्ञान का प्रसार होगा तथा भाषा के प्रति आत्मीयता का संबंध स्थापित होगा। 
समेकित - कोश योजना
 
योजना का लक्ष्य - हिन्दी भाषा तथा उसकी क्षेत्रीय भाषाओं (अवधी, ब्रज, भोजपुरी, बुन्देली) के बीच स्थित भाषिक परिवर्तनों को समझने तथा उसका तुलनात्मक अध्ययन करने एवं हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में योगदान देना।
 
योजना का विस्तृत विवरण- शब्द और उनके समुच्चय से बनी भाषा मनुष्य की सम्पदा है। भारत सामासिक संस्कृति से रचा हुआ देश है, जहाँ हर प्रान्त की भाषा बोली अलग-अलग है। हिन्दी भाषा तथा उसकी क्षेत्रीय भाषाओं में समान अर्थ-संकेत के लिये अलग-अलग शब्दों का प्रयोग किया जाता है। जैसे हिन्दी के ‘बेटा’ शब्द के लिये  अवधी, ब्रज, भोजपुरी, बुन्देली भाषा में अलग-अलग शब्द का प्रयोग किया जाता है। अगर एक ही शब्द कोश में हिन्दी भाषा के साथ एक ही शब्द के लिए अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के शब्द भी जिज्ञासुओं  को एक साथ मिल जाएँ जो भाषिक दूरी को कम किया जा सकता है तथा हिन्दी को प्रतिष्ठापित करने में सहायता होगी।
 
समेकित कोश योजना -वर्तमान में हिन्दी तथा उसकी क्षेत्रीय भाषाओं को दृष्टिगत रखते हुए हिन्दुस्तानी एकेडेमी ने ‘समेकित कोश’ की एक वृहद् योजना बनाई है। इसमें हिन्दी तथा क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दो को एक साथ संग्रहित किया जाना है। यह कोश विद्वानों तथा जिज्ञासुओं के साथ व आमजन के लिये भी उपयोगी सिद्ध होगा। यह अत्यन्त श्रमसाध्य, खोजपूर्ण एवं साधनापरक साहसिक कार्य है, जिसके लिये भाषा के मर्मज्ञ विद्वानों के जीवन्त सहयोग की आवश्यकता होगी। इस ‘समेकित भाषा कोश’ में हिन्दी तथा ब्रजभाषा, हिन्दी तथा अवधी भाषा, हिन्दी तथा भोजपुरी भाषा, हिन्दी तथा बुन्देली भाषा के अलग - अलग कोश तैयार किये जायेगें तथा इनके निर्माण के बाद इन्हें  ‘समेकित भाषा कोश’ के रुप में भी प्रकाशित किया जायेगा। 
 
योजना का प्रारूप - यह योजना पाँच खण्डों में होगी। हिन्दी शब्दों के लिए प्रयुक्त व्यवहारिक क्षेत्रीय भाषा के शब्दों का चयन करने के बाद एक सूची तैयार की जायेगी। 
प्रथम खण्ड  - हिन्दी - अवधी भाषा का शब्द कोश तैयार करना।
द्वितीय खण्ड - हिन्दी - भोजपुरी भाषा का शब्द कोश तैयार करना।
तृतीय खण्ड  - हिन्दी - ब्रज भाषा का शब्द कोश तैयार करना।
चतुर्थ खण्ड  - हिन्दी - बुन्देली भाषा का शब्द कोश तैयार करना।
पंचम खण्ड  - हिन्दी - अवधी, ब्रज, भोजपुरी तथा बुन्देली का समेकित कोश तैयार करना।
 
 भाषायें - 1. हिन्दी 2.  अवधी 3.  ब्रज 4.  भोजपुरी 5.  बुन्देली
कमजोर वर्ग के मेधावी शोध छात्रों तथा छात्राओं के लिये छात्रवृत्ति तथा उनके शोध ग्रन्थ का प्रकाशन - गरीबी रेखा के नीचे कमजोर वर्ग के मेधावी छात्रों के लिये यह योजना प्रस्तावित है। अध्ययन में रूचि रखने वाले तथा जिज्ञासु शोध छात्रों को चयनित करके प्रतिमाह 1,000 की धनराशि छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान किया जाना प्रस्तावित है। जो तीन वर्ष के लिये दी जायेगी। यह योजना प्रतिवर्ष हिन्दी तथा उसकी क्षेत्रीय भाषायें (भोजपुरी, अवधी, ब्रज तथा बुन्देली) के पांच चयनित शोध छात्रों को तीन वर्ष तक दी जायेगी। यह योजना प्रतिवर्ष पाँच मेधावी छात्रों के लिये होगी।