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परियोजना एवं योजना

हिन्दी साहित्य एवं उसके शैलियों के संवर्धन एवं विकास के लिये एकेडेमी की पत्रिका ‘हिन्दुस्तानी’ अनवरत कार्य करती रही है। पत्रिका के सामान्य अंकों में ब्रज, अवधी, भोजपुरी एवं बुन्देली जैसी क्षेत्रीय भाषाओं पर अनेक महत्वपूर्ण आलेखों का प्रकाशन हुआ है। कुछ उल्लेखनीय लेखकों में -अम्बा प्रसाद ‘सुमन’ (अवधी), रामाज्ञा द्विवेदी (अवधी) शालिग्राम शर्मा (अवधी) बलभद्र प्रसाद दीक्षित पढ़ीस (अवधी), श्रीराम शर्मा (ब्रजभाषा), रामस्वरूप चतुर्वेदी (ब्रजभाषा), जगदीश गुप्त (ब्रजभाषा), ब्रजरत्न दास (ब्रजभाषा), डाॅ0 सरोज गुप्त (ब्रजभाषा), डाॅ0 ब्रज भूषण चतुर्वेदी(ब्रजभाषा),पूरन चन्द्र श्रीवास्तव (बुन्देली), महावीर सरन जैन (बुंदेली), अवध किशोर जड़िया (बुन्देली),नर्मदा प्रसाद गुप्त (बुंदेली), डाॅ0 वी0 एस0 परमार (बुंदेली), लक्ष्मी नारायण दुबे (बुन्देली), उदयनारायण तिवारी (भोजपुरी), बलदेव उपाध्याय (भोजपुरी), कृष्णदेव उपाध्याय (भोजपुरी), त्रिलोकी राय (भोजपुरी), डाॅ0 राम सुधार सिंह (भोजपुरी) विशेष रूप से रेखांकित करने योग्य हैं।


हिन्दी तथा क्षेत्रीय भाषाओं के महत्वपूर्ण रचनाकारों पर ‘हिन्दुस्तानी’ पत्रिका के कतिपय विशेषांक भी अत्यंत उल्लेखनीय है। इन विशेषांकों में - सूर, लोक संस्कृति, प्रेमचन्द, रामचन्द्र शुक्ल, निराला, पंत, महादेवी, मैथिलीशरण गुप्त, भगवती चरण वर्मा, हजारी प्रसाद द्विवेदी, विद्याा निवास मिश्र, सुभद्रा कुमारी चैहान, अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, वृन्दावन लाल वर्मा, सियाराम शरण गुप्त, बलभद्र प्रसाद दीक्षित ‘पढ़ीस’, राय राजेश्वर बली, जैनेन्द्र इत्यादि हैं।


क्षेत्रीय भाषाओं के संवर्धन एवं विकास की दिशा में हिन्दुस्तानी एकेडेमी की ओर से शासन द्वारा अपेक्षित महत्वपूर्ण कार्ययोजनाएँ निम्नवत है -


  • हिन्दी तथा उसकी क्षेत्रीय बोलियाँ - भोजपुरी, अवधी, ब्रजभाषा एवं बुन्देली के संयुक्त / पृथक-पृथक शब्दकोश का प्रकाशन।
  • क्षेत्रीय भाषाओं की महत्वपूर्ण अवधारणाओं, प्रवृत्तियों, हस्ताक्षरों, तथा कृतियों के वृहत साहित्यकोश का निर्माण।
  • क्षेत्रीय भाषाओं के संबंध में जागरूकता पैदा करने तथा नयी पीढ़़ी को प्रोत्साहित करने के लिये महत्वपूर्ण पुस्तकों का पुस्तकालय हेतु क्रय किया जाना।
  • क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य इतिहास को कलमबद्ध करने हेतु महत्वपूर्ण विद्वानों, आलोचकों एवं सम्पादकों का विद्वत मण्डल गठित किया जाना।
  • क्षेत्रीय उदीयमान रचनाकारों को प्रोत्साहन देने के लिये क्षेत्रीय भाषा के संबंध में कार्यशालाओं, गोष्ठियों,सेमिनार, वाद संवाद तथा रचनापाठ का आयोजन किया जाना।
  • क्षेत्रीय भाषाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विद्वानों का सम्मान किया जाना।
  • हिन्दुस्तानी एकेडेमी द्वारा क्षेत्रीय भाषा के साहित्यकारों हेतु साहित्यकार कल्याण कोष की स्थापना करना।
  • क्षेत्रीय भाषाओं की पाण्डुलिपियों के संरक्षण एवं प्रकाशन में सहयोग।
  • क्षेत्रीय भाषाओं के क्षेत्र में कार्य कर रही सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं के साथ संयुक्त कार्यक्रम और कार्यशालाओं का आयोजन।
  • क्षेत्रीय भाषाओं के संबंधित क्षेत्र के महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों से संपर्क करना तथा शोधार्थियों हेतु शोध केन्द्रों की स्थापना, स्थान विशेष में इनके प्रचार प्रसार और संर्वधन के लिये योजनाबद्ध तथा चरणबद्ध रुप से कार्यक्रम एवं योजनाओं का संचालन करना।
  • सोशल मीडिया के माध्यम से हिन्दुस्तानी एकेडेमी की वेबसाइट को सुदृढ़ बनाकर हिन्दी सहित क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति जागरूकता एवं प्रचार -प्रसार करना।
  • एकेडेमी द्वारा वर्तमान में प्रकाशित की जा रही त्रैमासिक पत्रिका को मासिक कर दिया जाये और चारों बोलियों और भाषाओं आदि पर केन्द्रित प्रत्येक त्रैमासिक में एक विशेषांक का प्रकाशन करना।

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