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हिन्दुस्तानी एकेडेमी पुस्तकालय

हिन्दी तथा उसके विभिनन रूपों एवं शैलियों को समृद्ध तथा समुन्नत बनाने के विचार से उत्तर प्रदेश शासन ने 1927 में ‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी’ की स्थापना की थी। इस विद्वत परिषद् ने अपने उद्देश्यों को इस प्रकार व्याख्यायित किया है - राजभाषा हिन्दी, उसके साहित्य तथा उसके ऐसे अन्य रूपों और शैलियों जैसे उर्दू, ब्रजभाषा, अवधी, भोजपुरी आदि का परिरक्षण, संवर्धन, और विकास। अपने लक्ष्यों की पूर्ति के लिये एकेडेमी ने मौलिक कृतियों, संदर्भ-ग्रन्थों, मानक अनुवाद-ग्रन्थों तथा प्राचीन काव्यों का पाठानुशीलन आदि के कार्य सम्पन्न करा कर अनेक महन्वपूर्ण कृतियों के सृजन प्रणयनमें उल्लेखनीय योग किया है। हिन्दुस्तानी एकेडेमी की ज्ञापिका में दिये हुए उद्देश्य में से एक उद्देश्य पुस्तकालय की स्थापना और पुस्तकों के रख-रखाव का है। लक्ष्य यह रहा है कि इसे हिन्दी-उर्दू भाषाओं की पुस्तकों का प्रान्तीय स्तर पर केन्द्रीय पुस्तकालय के रूप में गठित किया जाय। 26 मार्च 1927 को सर विलियम मैरिस तत्कालीन गवर्नर ने अपने उदधाटन भाषण में कहा कि ‘इसे एक वृहत् पुस्तकालय के रूप में गठित किया जाय। उन्होंने कहा कि मैं इसे व्यवस्थित रूप में देखना चाहता हूँ। यदि आवश्यक हो तो संविधान बनाकर संयुक्त प्रान्त में प्रकाशित होने वाली देशभाषा की समस्त पुस्तकों की एक प्रति हिन्दुस्तानी एकेडेमी पुस्तकालय में अवश्य भेजी जाय जिससे यह देशभाषा की पुस्तकों के विशाल संग्रह से एक बड़ा पुस्तकालय बन सके। शीघ्र ही एकेडेमी ने पुस्तकालय के लिये आवश्यक कार्यवाही शुरू कर दी। कुछ वर्षों तक पुस्तकालय हेतु पुस्तकों का संग्रह भी किया गया, किन्तु आवश्यक धनराशि के आभाव में यह कार्य पुनः कुछ वर्षाें के लिये रूक गया। वर्तमान समय में हिन्दुस्तानी एकेडेमी पुस्तकालय में अनेक महत्वपूर्ण एवं दुलर्भ ग्रन्थों का समुचित संग्रह तथा संचय है।


उत्तर प्रदेश अनेक विश्वविद्यालयों के भाषा तथा साहित्य विभागों में शोधकार्य हो रहा है। परन्तु शोधकार्य करने वाले विद्यार्थियों को वांछित पुस्तकें आदि खरीदने तथा शोधग्रन्थों को सर्वाड्गपूर्ण बनाने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस दृष्टि से एकेडेमी पुस्तकालय में विभिन्न कालों से संबद्ध अलभ्य साहित्य उपलब्ध है। पुस्तकालय में हिन्दी, उर्दू, संस्कृत, अंग्रेजी, बाँगला, मराठी, गुजराती एवं अन्य भारतीय भाषाओं की कुल मिलाकर लगभग पच्चीस हजार (25,000) ऐसी उच्चस्तरीय गंभीर पुस्तकें सुलभ हैं। जो अब समान्यतः नगर एवं अन्य पुस्तकालयों अथवा बाजार में उपलब्ध नही हैं। इनके अतिरिक्त पुस्तकालय में हस्तलिखित एवं मोनो ब्लाक से मुद्रित प्राचीन पाण्डुलिपियों का संग्रह भी है। इनकी कुल संख्या 330 है। यह समस्त दुर्लभ सामग्री राजर्षि पुरूषोतमदास टंडन जी के औदात्य से प्राप्त हुई। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं संग्रह अलग से है। जिनके अंकों की संख्या लगभग 8,000 हजार हैं। इसके अतितिक्त अनेक मासिक साप्ताहिक एवं दैनिक पत्र पत्रिकाएँ भी पाठकों की आवश्यकता और रूचि को देखते हुए मँगाये जाते हैं। उद्देश्य यह है कि इस संग्रह को और अधिक पूर्ण किया जाये और अनुसंधित्युओं को अधिक सुविधा प्रदान की जाये।


प्रयाग के अनेक विद्वानों ने एकेडेमी पुस्तकालय को अपनी तमाम पुस्तकें भेंट स्वरूप देकर हिन्दुस्तानी एकेडेमी को उपकृत और पुस्तकालय को समृद्ध बनाने का सद्प्रयास किया है। स्व0 धीरेन्द्र वर्मा और श्री बालकृष्ण राव ने अपनी निजी संकलन की पुस्तकें एकेडेमी पुस्तकालय को निःशुल्क इस शर्त पर दी थी कि एकेडेमी अपने पुस्तकालय में व्यवस्थित रीति से रखे़ और शोधार्थियों को उनके उपयोग की सुविधा दे। इनके बाद डाॅ बाबूराम सक्सेना ने अपनी निजी संकलन की बहुत सी पुस्तकें एकेडेमी पुस्तकालय को दी । उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ का योगदान अनन्यतम है। कुछ समय बाद वर्ष 1966 डाॅ राजेन्द्र कुमार वर्मा ने अपने निजी संग्रह से 120 पुस्तकें भेंट की। सबसे आगे बढ़कर डाॅ वर्मा ने वर्ष 2000 में एकेडेमी पुस्तकालय को लगभग 700 पुस्तकें दीं। डाॅ वर्मा के कृपापूर्ण सौजन्य से एकेडेमी पुस्तकालय अभिभूत और उनके प्रति सदैव आभारी रहेगा। डाॅ माताप्रसाद गुप्त के पुत्र डाॅ सालिगराम गुप्त ने अपने पिता के संग्रह की लगभग 300 पुस्तकें एकेडेमी पुस्तकालय को बड़े सहजभाव से दी। पुस्तकालय उनके औदात्य की सराहना करता है। अन्य जिन विद्वानों ने एकेडेमी पुस्तकालय में योगदान किया, उनमें सर्वप्रथम एकेडमी के पूर्व अध्यक्ष श्री हरिमोहन मालवीय के विस्तृत सद्प्रयास और निरन्तर अभिवृद्धि की दिशा में उठाये गये कदम अविस्मरणीय है। वस्तुतः उनके सौजन्य और प्रयास से वर्ष 1998 से 2001 के बीच एकेडेमी पुस्तकालय को लगभग रू0 पाँच लाख (रूपये 5,00,000) की पुस्तकें सुलभ हुईं। यह अत्यन्त श्लाधनीय कार्य है कि और पुस्तकालय उनकी इस महति कृपा के लिए हमेशा उपकृत रहेगा। अन्य जिन व्यक्तियों ने एकेडेमी पुस्तकालय को पुस्तकें देकर सहयोग किया है, उनमें प्रो0 संगमलाल पाण्डेय, डाॅ0 मीरा श्रीवास्तव, श्री रमेश चन्द्र द्विवेदी, डाॅ0 जगदीश गुप्त के नाम उल्लेखनीय है।


एकेडेमी के पुस्तकालय में पुस्तकों के वर्गीकरण एवं रख रखाव के लिए पूर्व पुस्तकालयाध्यक्ष श्री कैलाश नाथ शुक्ल एवं श्री गोपाल जी पाण्डेय का योगदान अविस्मरणीय है। एकेडेमी की प्रकाशन अधिकारी श्रीमती ज्योतिर्मयी का मार्ग दर्शन एकेडेमी पुस्तकालय को प्राप्त होता रहता है। एकेडेमी के पूर्व अध्यक्ष माननीय डाॅ0 सुनील जोगी, पूर्व सचिव श्री बृजेश चन्द्र एवं कोषाध्यक्ष श्री रविनन्दन सिंह जी के अथक प्रयास से एकेडेमी पुस्तकालय का कम्प्यूटरीकरण दु्रत गति से किया जा रहा है। पुस्तकों के कम्प्यूटर पर चढ़ जाने के बाद शोधार्थियों को विषयवार पुस्तकें प्राप्त करने में अत्यन्त सुविधा होगी। पुस्तकालय के वर्तमान पुस्तकालयाध्यक्ष श्री रतन पाण्डेय, श्री मोहसिन खान एवं कैटलागर श्री अनुराग ओझा के अथक प्रयास से पुस्तकालय में कम्प्यूटरीकृत कैटलाग का कार्य लगभग सम्पूर्ण हो चुका है। एकेडेमी के वर्तमान सचिव श्री रवीन्द्र कुमार ने अपने पद भार ग्रहण करने के बाद उसी दिन प्रथम निरीक्षण में ही पुस्तकालय में उचित पाठक क्षेत्र की आवश्यकता महसूस की। उन्होंने इस कार्य को प्राथमिकता पर लेकर एक माह के अन्दर एक सुसज्जित एवं आधुनिक पाठक क्षेत्र का निर्माण कराया। वर्तमान में पुस्तकालय में हुए बदलाव को देख कर पाठक, विद्वान, साहित्यकार एवं शोधछात्र प्रफुल्लित हो रहे हैं।


एकेडेमी पुस्तकालय में निम्नलिखित पत्र-पत्रिकाएँ वर्तमान समय में उपलब्ध हैं -


समाचार पत्र


1) दैनिक जागरण (2) हिन्दुस्तान (3) अमर उजाला (4) जनसत्ता (5) अमृत प्रभात (6) डेली न्यूज एक्टिविस्ट (7) टाइम्स आॅफ इण्डिया (8) रोजगार समाचार

पत्रिकाएँ


(1) अंतिम जन (2) विज्ञान (3) कादम्बिनी (4) वागर्थ (5) आजकल (6) अक्षरा (7) श्रीप्रभु प्रतिमा (8) नया ज्ञानोदय (9) वैचारिकी (10) साहित्य भारती (11) रचना उत्सव (12) सम्मेलन पत्रिका (13) अहा जिंदगी (14) राष्ट्रभाषा (15) कथादेश (16) दृश्यांतर (17) तरंग (18) मंगलम (19) हिन्दी अनुशीलन (20) दस्तावेज (21) साहित्य अमृत (22) तद्भव (23) संकल्प (24) शिखर वार्ता (25) संगीत (26) साक्षात्कार (27) आलोचना (28) हिन्दुस्तानी जबान (29) इण्डिया टुडे (30) मानवाधिकार दर्पण (31) द्वीप लहरी (32) लोकवार्ता (33) हिन्दुस्तानी (34) उर्दू एकेडेमी की पत्रिका। प्रयाग में उच्चस्तरीय शोधार्थियों, अनुसधित्सुओं तथा विद्वानों का एक ऐसा वर्ग है जो प्राचीन तथा मध्ययुगीन इतिहास, राजनीति, पुरातत्व, दर्शनशास्त्र तथा हिन्दी-उर्दू-संस्कृत के विविध क्षेत्रों में सदैव अनुसंधानरत रहता है। सम्प्रति एकेडेमी पुस्तकालय के पास उल्लेखनीय पुस्तक-राशि है तथा शान्त वातावरण में बैठकर गंभीर अध्ययन के लिए पर्याप्त सुविधएँ हैं। एकेडेमी पुस्तकालय रविवार एवं अन्य अवकाश दिनों को छोड़कर शेष दिन प्रातः 10 बजे से सायंकाल 5 बजे तक खुला रहता है। पुस्तकालय में उच्च परीक्षोतीर्ण विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्यकारों एवं विद्वानों को उच्च अध्ययन या अनुशीलन के लिए पाठ्य सामग्री की सुविधा सुलभ है। अन्त में पुस्तकालय अपने पाठकों का आहान और उनका स्वागत करता है।

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