0532-240-7625

info@hindustaniacademy.com

Kamla Nehru Rd, George Town,

Allahabad, Uttar Pradesh 211001

ताज़ा खबर

परिचय

‘हिन्दुस्तानी’ शब्द जिसके मूल मे हमारी भाषा रही है, जिसे हम राष्ट्रभाषा का स्वरूप देना चाहते थे, ईसा की सोलहवीं शताब्दी से ही इसका प्रयास हो रहा था। स्वदेशी रूप में ‘हिन्दुस्तानी’ नाम के स्वरूप में, जिसे सत्रहवीं शताब्दी से प्रयोग में लाने का प्रयास हुआ इसका प्रमाण है कैसरबाग, लखनऊ में अमीरूदौला प्राॅविंशियल लाइब्रेरी नामक पुस्तकालय मे रखी देवनागरी लिपि की विशाल हस्तलिपि जिसकी प्राप्ति से हिन्दुस्तानी का सही आकार स्पष्ट होता है यद्यपि जिसकी प्राप्ति अत्यन्त प्राचीन प्रतीत होती है, किन्तु इसमें स्पष्ट निर्देश है कि ये हिन्दुस्तानी में है, हिन्दुस्तानी भाषा की इस पुस्तक में देवनागरी के साथ अरबी-फारसी शब्दों का भी बहुतायत प्रयोग है। ‘हिन्दुस्तानी’ ज़बान की भाषा में मुख्यतः हिन्दी के साथ अन्य जबाने भी जुड़ी हुई थी।

  • img01

उद्देश्य एवं कार्य

1. राजभाषा हिन्दी, उसके साहित्य तथा ऐसे अन्य रूपों एवं शैलियों (जैसे उर्दू, ब्रजभाषा, अवधी, भोजपुरी आदि) का परिरक्षण, संबर्द्धन और विकास करना, जिससे हिन्दी समृद्ध हो सकती है।
2. हिन्दीतर भारतीय भाषाओं तथा विदेशी भाषाओं की साहित्यिक कृतियों का हिन्दी में अनुवाद कराना।
3. मौलिक हिन्दी कृतियों, सृजनात्मक साहित्य का प्रोत्साहन एवं प्रकाशन।
4. राज्य सरकार की सहमति से हिन्दी में सन्दर्भ ग्रन्थ तैयार कराना तथा उनका प्रकाशन।
View More

सन्देश

सचिव

हिंदुस्तानी एकेडेमी की ऐतिहासिक एवं साहित्यिक परम्परा अत्यंत समृध्द रही है | हिंदी उर्दू के बीच सेतु के रूप में कार्य करते हुए इस संस्था ने विकाश की अनेक मंजिले तय की है | इसके विकास क्रम में अनेक अरोह-अवरोह भी आए किन्तु यह सतत क्रियाशील रही | मेरी कामना है की एकेडेमी को व्यापकता मिले तथा उसका मार्ग प्रशस्त रहे | मेरी कोशिश है जिन उददेश्यो के लिए इस संस्था की स्थापना हुई है वो उददेश्य हासिल हो | मै उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ|

कोषाध्यक्ष

हिंदुस्तानी एकेडेमी हिंदी -उर्दू दोनों जबानो का मरकज रहा है | इसकी बुनियाद बहुत पुख्ता है था उसके जरिए हिंदी -उर्दू के संजीदा लिखने पढ़ंने वालो को एक जगह इकठ्टा करने की फ़िक्र की गयी थी | अदबी रवायत को बचाने के लिए इस संस्था ने बड़ा काम किया है | इसके पास दोनों जबानो की किताबो का ऐसा सरमाया है जो अन्यत्र दुर्लभ है | इसकी संजीदा रवायत को बचाने के लिए पढ़े- लिखे लोगो को फ़िक्र करनी चाहिए हमारी यह तहजीबी और अदबी धरोहर सिर्फ कहानी न रह जाय, आए आपस में मिल जुलकर काम करे |.

हमारे प्रकाशन

img06

img06

संपर्क सूत्र

Subscribe to our newsletter

Top